
"जल्दी करो देर मत करो और चलो अपने धाम को। यह तुम्हारा देश नहीं, यह परदेश है। पाप पुण्य जो करोगे उसे भोगना पड़ेगा। पाप पुण्य दोनों को महात्मा धो देंगे फिर आत्मा निर्मल और साफ हो जायेगी फिर जन्म-मरण का चक्कर समाप्त हो जायेगा”
परिवर्तन ऐसे होगा कि तुम जान नहीं पाओगेहर वर्ष की तरह इस वर्ष २००६ का भण्डारा २७ नवम्बर से ३ दिसम्बर तक मथुरा में मनाया गया। इतने लोग आये कि पिछले भण्डारों का रेकार्ड टूट गया। लोगों का अनुमान है कि अस्सी लाख लोगों ने भाग लिया।बाबा जी ने अपने सन्देष में कहा कि मालिक को पाने के लिये रोना पड़ता है। मीराबाई, नानक जी, गोस्वामी तुलसीदास जी, सभी महात्मा रोये मालिक के दर्षन दीदार के लिये। युगों-युगों तक नरकों और चौरासी लाख योनियों में चक्कर लगाने के बाद यह मनुष्य शरीर तुम्हें मिला है। केवल इसी द्यारीर में प्रभु के पास जाने का रास्ता है। जीवात्मा शरीर में दोनों आंखों के पीछे बैठी है और वहीं से ऊपर के लोकों स्वर्ग, बैकुण्ठ आदि में रास्ता गया है। महात्मा इस भेद को बतायेंगे जो रोज दैविक मण्डलों में जाते-आते रहते हैं।काफिला निकलेगा। प्रतिदिन ५०-५० किलोमीटर की यात्रा होगी। २० दिनों का कार्यक्रम होगा। तुम देखना कि जगह-जगह कितनी भीड़ होती है। आज सभी लोग रो रहे हैं। किसी को सुख और आराम नहीं। अब सभी परिवर्तन चाहते हैं। मैंने पहले बहुत कुछ कहा है, उसे सब लोग पढ़ें। जो-जो बातें कही हैं, वो सब सामने आयेंगी। हमें बार-बार कहने की जरूरत नहीं। परिवर्तन होगा। परिवर्तन ऐसे होगा कि तुम जान नहीं पाओगे। एक ही झटके में सारी दुनियां जाग जायेगी।हम चाहते हैं कि तुम्हारी जीवात्मा पर नये कर्मों के पर्दे न चढ़ने पावें। जो अब तक चढ़े हैं, उन्हें साफ कर दिया जाये। मैं सबसे अपील करता हूं कि चौबीस घण्टें में से दो घण्टे समय मुझे दे दो और भजन करो। जब जीवात्मा की आंख जिसे तीसरी आंख, दिव्य द्रिष्टि कहते हैं, खुलेगी तो दिव्य ज्योति दिखाई देगी और परमात्मा का दर्षन दीदार होगा। आने वाला समय बहुत ही खतरनाक है। कुदरत किसी को बख्शने वाली नहीं। कोहराम मचेगा। कुदरत का चक्र जब चलेगा तब उसमें लोग पिस जायेंगे। थोड़े लोग बचेंगे जो अच्छे होगे, धार्मिक होंगे। जो लोग महात्माओं की द्यारण में होंगें, उन्हें आंच तो लगेगी मगर जलने नहीं पायेंगे।

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